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अपनी ही धरा में हुई, अनजान है हिन्दी : पंकज प्रियम

हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प

मधुपुर। हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्योदय के बैनर तले महेन्द्र मुनि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, मधुपुर में विशेष कवि सम्मेलन एवं काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

साहित्योदय के संस्थापक अध्यक्ष पंकज प्रियम ने हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प प्रत्येक हिंदुस्तानी को लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी देशवासियों को जोड़ने वाली भाषा है और इसे केवल हिन्दी दिवस तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन में सम्मानपूर्वक अपनाने की आवश्यकता है।

पंकज प्रियम ने “अपनी ही धरा में हुई

अनजान है हिन्दी” सहित हिन्दी की दशा, AI के बढ़ते प्रभाव एवं उसके दुरुपयोग तथा भविष्य के भारत जैसे विषयों पर ओजपूर्ण कविताओं का पाठ किया। उनकी रचनाओं पर विद्यार्थियों एवं उपस्थित श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं।

विद्यालय के प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने तथा विद्यालय के नवांकुरों को साहित्यिक मंच प्रदान करने के लिए साहित्योदय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी के उत्थान के लिए ऐसे ही समर्पित साहित्य साधकों की जरूरत है। प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली प्रेरणादायक कविता भी प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य विनोद कुमार तिवारी ने किया। हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष काव्य प्रतियोगिता में कई छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट काव्य पाठ के लिए बहन साक्षी कुमारी एवं भैया देवाशीष कुमार को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पंकज प्रियम एवं प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने प्रदान किए।

इस मौके पर पंकज प्रियम ने कहा कि विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए शीघ्र ही विद्यालय में स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने पंकज प्रियम को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं पंकज प्रियम ने प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा, उप प्रधानाचार्य शिवनाथ झा एवं आचार्य विनोद कुमार तिवारी को अंगवस्त्र एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।

धन्यवाद ज्ञापन उप प्रधानाचार्य शिवनाथ झा ने किया। कार्यक्रम का समापन “जय भारत, जय हिन्दी” के उद्घोष के साथ हुआ।

— क्रॉसफायर संवाददाता, मधुपुर
हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प प्रत्येक हिंदुस्तानी को लेना चाहिए

मधुपुर। हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्योदय के बैनर तले महेन्द्र मुनि सरस्वतीअपनी ही धरा में हुई, अनजान है हिन्दी : पंकज प्रियम

हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प प्रत्येक हिंदुस्तानी को लेना चाहिए

मधुपुर। हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्योदय के बैनर तले महेन्द्र मुनि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, मधुपुर में विशेष कवि सम्मेलन एवं काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

साहित्योदय के संस्थापक अध्यक्ष पंकज प्रियम ने हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प प्रत्येक हिंदुस्तानी को लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी देशवासियों को जोड़ने वाली भाषा है और इसे केवल हिन्दी दिवस तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन में सम्मानपूर्वक अपनाने की आवश्यकता है।

पंकज प्रियम ने “अपनी ही धरा में हुई, अनजान है हिन्दी” सहित हिन्दी की दशा, AI के बढ़ते प्रभाव एवं उसके दुरुपयोग तथा भविष्य के भारत जैसे विषयों पर ओजपूर्ण कविताओं का पाठ किया। उनकी रचनाओं पर विद्यार्थियों एवं उपस्थित श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं।

विद्यालय के प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने तथा विद्यालय के नवांकुरों को साहित्यिक मंच प्रदान करने के लिए साहित्योदय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी के उत्थान के लिए ऐसे ही समर्पित साहित्य साधकों की जरूरत है। प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली प्रेरणादायक कविता भी प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य विनोद कुमार तिवारी ने किया। हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष काव्य प्रतियोगिता में कई छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट काव्य पाठ के लिए बहन साक्षी कुमारी एवं भैया देवाशीष कुमार को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पंकज प्रियम एवं प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने प्रदान किए।

इस मौके पर पंकज प्रियम ने कहा कि विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए शीघ्र ही विद्यालय में स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने पंकज प्रियम को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं पंकज प्रियम ने प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा, उप प्रधानाचार्य शिवनाथ झा एवं आचार्य विनोद कुमार तिवारी को अंगवस्त्र एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।

धन्यवाद ज्ञापन उप प्रधानाचार्य शिवनाथ झा ने किया। कार्यक्रम का समापन “जय भारत, जय हिन्दी” के उद्घोष के साथ हुआ।

— क्रॉसफायर संवाददाता, मधुपुर शिशु विद्या मंदिर, मधुपुर में विशेष कवि सम्मेलन एवं काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

साहित्योदय के संस्थापक अध्यक्ष पंकज प्रियम ने हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प प्रत्येक हिंदुस्तानी को लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी देशवासियों को जोड़ने वाली भाषा है और इसे केवल हिन्दी दिवस तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन में सम्मानपूर्वक अपनाने की आवश्यकता है।

पंकज प्रियम ने “अपनी ही धरा में हुई, अनजान है हिन्दी” सहित हिन्दी की दशा, AI के बढ़ते प्रभाव एवं उसके दुरुपयोग तथा भविष्य के भारत जैसे विषयों पर ओजपूर्ण कविताओं का पाठ किया। उनकी रचनाओं पर विद्यार्थियों एवं उपस्थित श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं।

विद्यालय के प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने तथा विद्यालय के नवांकुरों को साहित्यिक मंच प्रदान करने के लिए साहित्योदय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी के उत्थान के लिए ऐसे ही समर्पित साहित्य साधकों की जरूरत है। प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली प्रेरणादायक कविता भी प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य विनोद कुमार तिवारी ने किया। हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष काव्य प्रतियोगिता में कई छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट काव्य पाठ के लिए बहन साक्षी कुमारी एवं भैया देवाशीष कुमार को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पंकज प्रियम एवं प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने प्रदान किए।

इस मौके पर पंकज प्रियम ने कहा कि विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए शीघ्र ही विद्यालय में स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा ने पंकज प्रियम को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं पंकज प्रियम ने प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्रा, उप प्रधानाचार्य शिवनाथ झा एवं आचार्य विनोद कुमार तिवारी को अंगवस्त्र एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।

धन्यवाद ज्ञापन उप प्रधानाचार्य शिवनाथ झा ने किया। कार्यक्रम का समापन “जय भारत, जय हिन्दी” के उद्घोष के साथ हुआ।

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