
संविदा पर 10 साल से अधिक सेवा देने वालों के नियमितीकरण पर झारखंड हाईकोर्ट का अहम आदेश
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने वर्षों से संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत नौ कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने और नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने 14 अगस्त 2024 के विभागीय आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके माध्यम से इन कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग को खारिज किया गया था।
10 वर्ष से अधिक लगातार सेवा का दिया आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय तक बिना किसी सेवा-विच्छेद के कार्य किया। अदालत ने माना कि केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर लंबे समय तक सेवा दे चुके कर्मचारियों को हटाना उचित नहीं माना जा सकता।
बताया गया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति 2004 से 2008 के बीच टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट, क्लर्क, ड्राइवर और पंप ऑपरेटर जैसे पदों पर हुई थी। जनवरी 2017 तक उन्हें मानदेय का भुगतान किया गया। इसके बाद बिना किसी औपचारिक आदेश के उन्हें काम से रोक दिया गया।
हाईकोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर सभी नौ याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल करते हुए नियमितीकरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाए।
याचिकाकर्ताओं में धरो उरांव, अरुण कुमार साहू, गौतम प्रसाद सिंह, आशीष रंजन, प्रदीप बड़ा, विष्णु देव शाह, अरविंद कुमार सिंह, अजय कुमार रजक और संतोष कुमार राम शामिल हैं।
ऊर्जा निगम के संविदा चालकों को भी राहत
इसी तरह झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत चालकों के मामले में भी हाईकोर्ट ने राहत दी है।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने करीब 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे संविदा चालकों के नियमितीकरण और संबंधित लाभ देने का आदेश दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2008 में चयन प्रक्रिया के बाद 22 चालकों को संविदा पर नियुक्त किया गया था और वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे थे।
अदालत ने कहा कि केवल पद स्वीकृत नहीं होने के आधार पर नियमितीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, लंबे समय से लगातार आवश्यक सरकारी कार्य करने वाले योग्य कर्मचारियों का मामला अधिक से अधिक अनियमित नियुक्ति का हो सकता है, लेकिन इसे स्वतः अवैध नियुक्ति नहीं माना जा सकता।
सभी संविदा कर्मचारियों पर स्वतः लागू नहीं
हालांकि, इस फैसले को सभी संविदा कर्मचारियों के लिए स्वतः लागू होने वाला सामान्य आदेश नहीं माना जाना चाहिए। नियमितीकरण प्रत्येक मामले के तथ्यों, नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा अवधि, पद की स्थिति और संबंधित नियमों के आधार पर अलग-अलग तय हो सकता है।




